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महाराज खेतसिंह खंगार जयंती पर विशेष-:

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 महाराज खेतसिंह खंगार जयंती पर विशेष-:                          ०-- बाबूलाल दाहिया               समस्त आदरणीय समस्त स्वजातीय बंधुओ को प्रणाम।         हमारे सामने एक टेविल रखी है। यदि हम इसे दशों हजार मीटर लम्बी चौड़ी एक पृथ्वी मानलें तो इसमें भारत का क्षेत्रफल मात्र एक वर्ग बित्ते का होगा। और इस पृथ्वी के अगर अब तक कल्पना किये धर्मो को देखें उनके भगवानों को देखें तो वह सैकड़ो की संख्या में चले जायगें।           क्योकि वह खुद के जन्मे भगवान नही बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में कल्पित लोगो के भगवान हैं। और यही स्थिति  तमाम धर्मो की भी हैं। यही कारण हैं कि जितने भगवानों की कल्पना अन्य क्षेत्रों वालो ने की वह हमारे भगवान नही हैं ?और जो हमारे क्षेत्र के कल्पित भगवान है वे अन्य क्षेत्रों के लोगो के भगवान नही बन सके।          बहरहाल समस्त पृथ्वी में तीन ही ऐसे धर्म हैं जो  सर्वाधिक हैं। वह हैं-- 1-- ईसाई 2- इस्लाम...

दहिया समाज की एकता का सन्देश (Dahiya Samaj Ki Ekta Ka Sandesh)

 सभी महानुभावों को सादर---  जय कैवाय माँ 🙏🏻🙏🏻🙏🏻 एक पहल दहिया राजवंश की एकता के लिए-: जैसा कि सभी महानुभावों को सर्वज्ञात है कि अपना इतिहास 9 वीं सदी से है, दहियों ने 18 परगनों में राज किया था, इसके बावजूद हम विकास के अनुसार हम पिछड़ गए । लेकिन आज हम कहाँ है?  पिछड़े होने के कई कारण हो सकते हैं --- जैसे-:  1. उच्चतम शिक्षा 2. एकता का अभाव 3. अन्य कौमो का साथ न देना 4. एक राज्य के दहिया दूसरे राज्य के दहियों में अंतर करना 5. सरनेम को न लिखना (दहिया शब्द की जगह सिर्फ राजपूत लिखना) 6. समाज का कोई राष्ट्रीय स्तर के संगठन न होना  7. यदि कोई व्यापार, व्यवसाय करना चाहता हो तो सहयोग न हो पाना  ______ ऐसे बहुत से कारण है, लेकिन अब समाज के युवाओं को समझना होगा , और हमारे माता -पिता का भी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि एक रोटी  कम खाएं लेकिन बिना भेदभाव किये चाहे लड़का हो  लड़की उसे उच्चतम शिक्षा के लिए प्रयास करें । एक आदरर्श रुपी संस्कारों को दिया जाय , ताकि वो बड़ों को सम्मान, छोटों को प्यार दे पाए। और समाज का यानी अपने वंश का इतिहास भी बताया जाए। ...

कल के दौर और आज के बदलते दौर में असमानता

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कल का दौर ..... (सयुंक्त परिवार ) परिवार में यदि किसी नए बच्चे का जन्म होता तो सबसे पहले खुशी दादा/दादी को होना। गाँव में किसी के यहाँ बच्चों की शादियां होना तो उस शादी में घर के सदस्य व रिश्तेदार के अलावा पूरे गाँव का शामिल होना। घर में यदि कोई आ जाये चाहे हो वो परिचित हो या या अपरचित उसको उसको शिष्टाचारयुक्त आदर सत्कार करना, पहले परिवार में घर में एक ही टेलीफोन होता था और सब फोन की घंटी बजने की आवाज सुनने को आतुर रहते थे। गाँव में यदि घूमने भी यदि निकले हैं तो सतर्क रहते थे की कही बड़े पिताजी ,बड़े भैया न देख लें यदि देख भी लिए तो मिस्टर इंडिया बनकर गायब और उनके घर पहुँचने से पहले घर में किताबे खोलना ताकि उनको लगे की हम कितने मनमुघद होकर पढ़ रहे हैं। एक समय का दौर था जब गाँवों में किसी एक मोहल्ले के एक घर में टेलीविजन हुआ करता था , और हम विद्द्यालय की छुट्टी होने या फिर सप्ताह के रविवार को इन्तजार रहता था की कब और कितना जल्दी रविवार आ जाये और हम अपना पसंदीदा धारावाहिक जैसे शक्तिमान ,आर्यमान ,अलिफ़ लैला , शाकालाका बूम बूम,चित्रहार आदि , देखने को बेसब्री से इन्तजार रहता थ...

दहिया समाज एकता की एक पहल (सम्पूर्ण भारतवर्ष के सभी राज्यों के लिए )

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* 🚩 जय माँ कैवाय 🚩 * * 🚩 जय महाराजा राणा चच्चदेव सिंह दहिया 🚩 * *क्षत्रिय दहिया राजवंश जो कि ऋषि वंश की 12 शाखाओं में से प्रमुख दधिचिक वंश दहिया समाज है ,जो कि भारतवर्ष के सम्पूर्ण राज्यों में निवास रत है,क्षेत्रीय अनुसार कई सरनेमों का प्रचलन है क्रमानुसार : दहिया,दहियावत,दहियक(राजस्थान ),(दहिया जाट ,हरियाणा,पंजाब, उत्तरप्रदेश  ),दाहिया,दहायत(मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़)   आदि।* दहिया समाज के गौरव को दर्शाती एक प्राचीन किवन्दती (राजस्थानी कहावत ) प्रचलित है कि- "चार मे सियो, जात मे दहिया। रण मे भोमिया,कटै न अटकै।।"    ''अर्थात् चारे मे सियो (स्थानीय भाषा मे एक घास का नाम), जाति मे दहिया, रण अर्थात् लडाई मे भोमिया कही भी कभी भी नही अटकते है या पीछे नही खिचकते है।''    नोट -: नई पीढ़ी के लिए (सम्पूर्ण भारतवर्ष के सभी राज्यों के लिए ) '' जो अपने समाज के लोग दाहिया ,दहायत, दहियावत ,दहियक,  दहैत लिखते हैं, 'उन सब को सूचित कर रहा हूँ कि वो आने वाली नई पीढ़ी में बदलाव लायें, उनके समस्त दस्तावेजों जैसे -: जन्म प्रमाण पत्र,अंकसूची,आधार कार्ड,...

क्षत्रिय दहिया राजवंश में कई सरनेमों का प्रचलन - ॐ

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                                       * 🚩 जय माँ कैवाय 🚩 * * 🚩 जय महाराजा राणा चच्चदेव सिंह दहिया 🚩 * *क्षत्रिय दहिया राजवंश जो कि ऋषि वंश की 12 शाखाओं में से प्रमुख दधिचिक वंश दहिया समाज है ,जो कि भारतवर्ष के सम्पूर्ण राज्यों में निवास रत है,क्षेत्रीय अनुसार कई सरनेमों का प्रचलन है क्रमानुसार : दहिया,दहियावत,दहियक(राजस्थान ),(दहिया जाट ,हरियाणा,पंजाब),दाहिया,दहायत(मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़,उत्तरप्रदेश ) ,दहात, दहैत ,दाहत (अन्य राज्यों में ) आदि।* क्षत्रिय दहिया राजवंश में कई सरनेमों का प्रचलन -: क्षत्रिय दहिया राजवंश में कई सरनेमों का प्रचलन -: क्षत्रिय दहिया समाज में कई सरनेमों का प्रचलन पाया जाता है,इसके बावजूद हमारे समाज में पूर्ण रूप से एकता पाई जाती है , एवं नवयुवाओं में समाज को उच्चतम शिक्षा की और अग्रेसित व संगठित करने की विचारधाराएं पायी जाती हो चाहे वह भारतवर्ष के किसी भी राज्य से तालुक रखतें हों । और सही बात है की अब हमारा समाज विभिन्न परिस...

दहिया खंगार संघ में अनेकता में एकता में विचार (मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़,उत्तरप्रदेश )

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दहिया समाज भारत के सम्पूर्ण राज्यों में पाई जाती है लेकिन कुछ नजदीक राज्यों के दहियों से ही सम्बन्ध हो पाते हैं सभी राज्यों के दहियों समाज के सदस्यों से आग्रह ह ै की वो अपने अपने राज्यों के सभी स्तरों जैसे गाँव,तहसील,जिला ,संभाग आदि में तहसील अध्यक्ष,जिलाध्यक्ष ,सम्भागीय अध्यक्ष , प्रदेशाध्यक्ष मनोनीत करें और अपने समाज को एकत्रित करने में सहयोग करें ........ आज के कुछ युवाओं द्वारा कई कई सवाल रहते हैं ...? ०१.दहिया समाज वंश /उदगम/इतिहास ०२.दहिया समाज में विभिन्नता ०३.दहिया/खंगार वंश में एकता (खंगार संघ से सम्बंधित शादी/विवाह सम्बन्ध मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़,उत्तरप्रदेश ) ०४.दहिया /खंगार समाज को राज्य सरकारों द्वारा अन्य अन्य श्रेणियों में रखा जाना (RTI - निष्कर्ष आर्थिक आधार में श्रेणियों में रखा गया ) ०५.दहिया/खंगार एक दूसरे से श्रेष्ठ /उच्च की होड़ में दहियों में प्रचलित सरनेम -: दहिया,दाहिया ,दहायत, दहियावत ,दहियक, दहात, दहैत   ..........आदि खंगारों में प्रचलित सरनेम -:खंगार ,खंगरोत परिहार,मिर्धा ,जादौन ,आरख,अरख,वर्मा ,राय..........आदि नोट -: "आदरणीय सभी दहिय...

दहियों का राजस्थान से मध्यप्रदेश तक का सफर

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                               * ।।इतिहास के पन्नों पर एक नजर ।। *                       "* दहियों का राजस्थान से मध्यप्रदेश तक का सफर * " दाहिया वंश और दहियावटी का इतिहास-: नेंनसी की ख्यात के अनुसार दहिया राजवंश - ‘’ मारवाङ मे सबसे ज्यादा शासन करने का श्रेय दहिया राजपूतो को जाता है। और ‘’ महाराजा राणा चच्चदेव सिंह दहिया जी का जन्म 04 मार्च 967, को परबतसरगढ़ नागौर में हुआ था। और हर वर्ष   04 मार्च को जयंती मनाई जाती है । ‘’ नागौर मे किन्सरिया गांव स्थित कैवाय माता ( कुल देवी ) मंदिर मे मिले शिलालेख पर लिखा है " दधिचिक वंश दहियक गढ़पति " यानि इस राजस्थान की धरती पर दहिया वंश का ही ज्यादा गढ़ो पर अधिकार रहा है।इसलिए तो दहियो को गढ़पति कहते है।लेकिन ज्यादा समय तक इतिहास नही लिखा जाने के कारण इनका ज्यादा वर्णन नही मिलता...