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अगर आप चाहते हो आपके बच्चों को कॉलेजों में जातिवाद का सामना न करना पड़े, जाति देख कर कम नंबर देना, फेल करना जैसे भेदभाव का सामना न करना पड़े तो UGC के नए कानून को सपोर्ट करो #We_Support_UGC #We_support_UGC_Act #UGC #we_support_ugc_bill

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       बीते कुछ दिनों से कुनबे ने तेजीके साथ, कभी  बासी नहीं होने दी कढ़ी में फिरसे उबाल लाने की खुराफात शुरू की हुई है । तरीका वही पुराना है, अधूरी जानकारी में तड़का लगाकर अफवाहें फैलाना,सूचना के अभाव से उपजे अज्ञान में व्हाट्सअप का गोबर खाद डालना । जातिश्रेष्ठता के वायरस – विषाणु – को संक्रामक बनाकर, पहले से दुर्बल समाज को बीमार बनाना । इरादा भी वही है ; सामाजिक न्याय के किसी आधे अधूरे कदम की भी मुखालफत करके उसे हिदूसमाज के लिए खतरा बताना और वर्चस्वकारी और अमानवीय जातिगत उत्पीड़न को शास्त्रसम्मत महान परम्परा बताते हुए उसकी रोकथाम के लिए किये जाने वाले मामूली और कमजोर कदमों को भी जातिवाद फैलाने वाला कहकर कोहराम मचाना ।  अलबत्ता मुद्दा इस बार नया है । इस बार यूजीसी के नए नियमों को बहाना बनाकर उन्माद पैदा किया जा रहा है । डेढ़ सयाने पोंगे इसे कथित सवर्ण समुदाय के लिए जीवन मृत्यु का संकट बता रहे हैं और संयोग से जाति विशेष में जन्मे कुछ भोले भाले घोंघे, बिना इस हंगामे के पीछे छुपी शातिर बदनीयत को समझे  उनके दाने को चुग कर भरमजाल में फंस रहे हैं ।  इनपंक्...

डॉ. भीमराव अम्बेडकर: एक युगपुरुष की अमर विरासत

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आज 6 दिसंबर के दिन हम डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर—बाबा साहेब—को उनके महापरिनिर्वाण दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। यह दिन केवल कैलेंडर की तिथि नहीं है, बल्कि भारत के संविधान के शिल्पकार, समानता के प्रहरी और करोड़ों वंचितों की आवाज रहे एक महान व्यक्तित्व का स्मरण है। दिसंबर की यह सुबह हमें याद दिलाती है कि एक व्यक्ति अपनी शिक्षा, संघर्ष और दृढ़ संकल्प के बल पर पूरे देश की दिशा बदल सकता है। आइए, इस लेख की शुरुआत हम बाबा साहेब के जीवन, उनके विचारों और उनकी अमर विरासत को समझने से करते हैं। 6 दिसंबर – महापरिनिर्वाण दिवस पर विशेष   6 दिसंबर भारतीय इतिहास का वह दिन है जब हमने देश के सबसे महान मानवतावादी, ज्ञानयोगी, न्यायप्रिय और करोड़ों वंचितों के मसीहा  डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर  को खो दिया। यह दिन हमें उनके संघर्ष, विचारों और उनके द्वारा दिए गए उस अमूल्य संविधान की याद दिलाता है जिसने भारत को एक आधुनिक लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाया। डॉ. अम्बेडकर केवल एक नेता नहीं थे, वे  समानता के योद्धा ,  कानूनविद ,  अर्थशास्त्री ,  समाज सुधारक  और सबसे बढ़कर  ...

वैद्य राम निहोर दाहिया जी के कुछ स्वस्थ संबंधित आयुर्वेदिक नुस्खे।

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 मुझे यह जानकर अति प्रसन्नता होती है कि दाहिया समाज हर क्षेत्र में उत्तरोत्तर तरक्की कर रहा है। वैद्य राम निहोर दाहिया मैहर जिला अंतर्गत अमरपाटन तहसील के धौरहरा ग्राम के निवासी हैं। उनके  नेत्र से संबंधित कुछ दोहे देखिए_ ०_ मिट्टी के नव पात्र में,            त्रिफला देय मिलाय।   सुवह रोज उठ धोइए,            नेत्र रोग मिट जाय।। ०_ ढरका कीचर लालिया,          रौहें खुजली पीर।      रोग रतौधी दूर हो,            धोए त्रिफला नीर।। ०__ और रोग उपजय नहीं,             अरु उपजा मिट जात।         जो त्रिफला के नीर से,               नयन धोय उठ प्रात।। ०_ काली मिर्च महीन कर ,            प्रति दिन खाबे जोय।   नेत्र रोग सब नष्ट हों,           दृष्टि गिद्ध सम होय।। ०_  फेर नहाएं सिर मगर ,        ...

“दाहिया दहायत चेतना सृजन बुक” — समाज चेतना की यात्रा से मातृशक्ति सम्मान तक

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   “जिस समाज का अपना इतिहास नहीं होता, उसका वर्तमान कमजोर और भविष्य अंधकारमय हो जाता है। इतिहास किसी समाज की आत्मा होता है — और आत्मा के बिना कोई अस्तित्व नहीं टिकता।” “A society without its own history loses the strength of its present and the light of its future.” बहुत सुंदर और सार्थक पहल  सोनू दहायत  जी  कि आप सभी लोगों के सामने इस ब्लॉग में अपके सामने लाया हूं जिसमे इनका  उद्देश्य —  “दाहिया दहायत चेतना सृजन बुक”  के तीनों संस्करणों को जोड़कर समाज में जागरूकता फैलाना — वाकई प्रेरणादायक है। 🌺 “दाहिया दहायत चेतना सृजन बुक” — समाज चेतना की यात्रा से मातृशक्ति सम्मान तक ✍️ नमस्कार साथियो, आज मैं आप सभी के साथ एक ऐसी सामाजिक यात्रा साझा करना चाहता हूँ जो केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि  हमारे समाज की आत्मा की अभिव्यक्ति  है — “दाहिया दहायत चेतना सृजन बुक” इस पुस्तक श्रृंखला का उद्देश्य सदैव स्पष्ट रहा है — 👉 समाज के उन प्रेरणादायक व्यक्तित्वों, मातृशक्ति, युवाओं और रक्षक वीर सपूतों को एक साथ लाना जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में  सा...

Principle of Marketing Management – आधुनिक विपणन की दिशा में एक मार्गदर्शक पुस्तक | सोनू दहायत और डॉ. शिवांगी दाहिया

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 हम बात करेंगे “Principle of Marketing Management – आधुनिक विपणन की दिशा में एक मार्गदर्शक पुस्तक” के बारे में। यह पुस्तक मार्केटिंग के सिद्धांतों को सरल हिन्दी में समझाती है और छात्रों, शिक्षकों तथा व्यवसायियों के लिए बहुत उपयोगी है।और आज के ब्लॉग में हम बात करने वाले हैं “मार्केट” यानी बाज़ार के बारे में। आज के समय में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो मार्केट की चर्चा न करता हो। शिक्षा प्रणाली (Education System) में भी अब मार्केटिंग एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है, क्योंकि आज के युग में मार्केट को समझना हमारे दैनिक जीवन का जरूरी हिस्सा बन चुका है। सुबह से लेकर शाम तक, हमारी हर ज़रूरत किसी न किसी रूप में मार्केट से जुड़ी हुई है — चाहे हम व्यापारी हों या ग्राहक। इसी बीच, मैं आपके लिए लेकर आया हूँ एक बेहद उपयोगी और सरल हिन्दी पुस्तक — जिसे लिखा है श्री  सोनू दहायत  और  डॉ. शिवांगी दाहिया  ने। इस ब्लॉग में हम इस पुस्तक के माध्यम से जानेंगे कि मार्केटिंग के सिद्धांत (Principles of Marketing) क्या हैं और यह पुस्तक हमारे सीखने के लिए क्यों खास है। Principle of Marketing ...

दाहिया–दहायत समाज का भव्य प्रांतीय महासम्मेलन रीवा

 रीवा के कृष्णा राज कपूर ऑडिटोरियम में आज दाहिया–दहायत समाज का भव्य प्रांतीय महासम्मेलन आयोजित किया गया। इस विराट आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में मध्य प्रदेश शासन के माननीय उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला जी ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। समाज के इस सम्मेलन में रीवा संभाग सहित आसपास के सभी जिलों से दाहिया–दहायत समाज के जिला अध्यक्ष, पदाधिकारी और समाज बंधु बड़ी संख्या में अपने साथियों के साथ पहुंचे और इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों और मंगलाचारण के साथ हुई, जिसके बाद समाज के वरिष्ठजनों एवं पदाधिकारियों ने मंच पर माननीय उप मुख्यमंत्री का पुष्पगुच्छ और शाल श्रीफल भेंटकर भव्य स्वागत और सम्मान किया। सभागार तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साह से गूंज उठा। महासम्मेलन में वक्ताओं ने समाज की एकता, सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और नई पीढ़ी को समाजसेवा व राष्ट्रनिर्माण की दिशा में प्रेरित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में समाज के विकास और संगठन की मजबूती का संकल्प लिया माननीय उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला जी ने अपने संबोधन में...

🇲‌🇦‌🇳‌🇩‌🇦‌🇱‌ 🇨‌🇴‌🇲‌🇲‌🇮‌🇸‌🇸‌🇮‌🇴‌🇳‌ (मंडल आयोग)

 🇲‌🇦‌🇳‌🇩‌🇦‌🇱‌ 🇨‌🇴‌🇲‌🇲‌🇮‌🇸‌🇸‌🇮‌🇴‌🇳‌ मंडल आयोग का मसिहा कौन? और दुश्मन कौन? भारत की राजनीति समझना है, तो 15 मिनट समय निकालकर जरूर पढ़ें | 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनी, जिसमें मोरारजी देसाई ब्राह्मण थे। जिनको जयप्रकाश नारायण द्वारा प्रधानमंत्री पद के लिए नामित किया गया था। चुनाव  में जाते समय जनता पार्टी ने अभिवचन दिया था, कि यदि उनकी सरकार बनती है, तो वे *काका कालेलकर कमीशन लागू करेंगे। जब उनकी सरकार बनी, तो OBC का एक प्रतिनिधिमंडल मोरारजी देसाई से मिला और काका कालेलकर कमीशन लागू करने के लिए मांग की मगर मोरारजी देसाई ने कहा कि 'कालेलकर कमीशन' की रिपोर्ट पुरानी हो चुकी है, इसलिए अब बदली हुई परिस्थिति मेँ नयी रिपोर्ट की आवश्यकता है। यह एक शातिर बाह्मण की OBC को ठगने की एक चाल थी।प्रतिनिधिमडंल इस पर सहमत हो गया और B.P. Mandal जो बिहार के यादव थे, उनकी अध्यक्षता*में *मंडल कमीशन बनाया गया।* बी पी मंडल और उनके कमीशन ने पूरे देश में घूम-घूमकर 3743 जातियों को OBC के तौर पर पहचान किया जो 1931 की जाति आधारित गिनती के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या का 52% थे। मंडल कमीशन द्...